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Mudra

Varun Mudra Method and Benefits In Hindi

वरुण मुद्रा यह मुद्रा जल तत्व का प्रतीक है। शरीर में जल तत्व की कमी होने के कारण शरीर में रक्त-विकार, रूखापन आदि कई बीमारियाँ जन्म ले लेती हैं। अतः विकार दूर करने के लिए वरुण मुद्रा का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस मुद्रा के लिए कनिष्ठा…

Surya Mudra Method and Benefits In Hindi

सूर्य मुद्रा अनामिका अँगुली पृथ्वी तत्व का प्रतीकात्मक स्वरूप है। अनामिका अँगुली हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार सूर्य सम्बंधी प्रभाव को दर्शाती है। यह अँगुली सूर्य के समान शरीर के विद्युत प्रवाह को भी प्रवाहित करती है। चित्रानुसार अनामिका…

Shunya Mudra (Akash Mudra) Method and Benefits In Hindi

शून्य मुद्रा (आकाशीय मुद्रा) इस शून्य मुद्रा द्वारा हमारे शरीर में उत्पन्न दोष जैसे - कर्ण रोग, कम सुनाई देना, कान का दर्द आदि दोष ठीक किये जा सकते हैं। चित्रानुसार मध्यमा अँगुली को अँगूठे की जड़ पर रखकर उस पर अंगूठे का हल्का दबाव बनाते हए…

Vayu Mudra Method and Benefits In Hindi

वायु मुद्रा शरीर में यदि वायु की अधिकता हो जाए तो कई प्रकार की बीमारियाँ हो जाती हैं। जैसे - हाथ-पैरों का कांपना, लकवा, गठिया, सिर दर्द, हृदय-विकार आदि कई प्रकार के वायु दोष इस वायु मुद्रा द्वारा दूर किए जा सकते हैं। चित्रानुसार तर्जनी…

Gyan Mudra Method and Benefits In Hindi

ज्ञान मुद्रा यह मुद्रा बहुत ज्यादा प्रचलित है। दिखने में साधारण और प्रभाव में अत्यधिक लाभ देने वाली है। पद्मासन, अर्द्ध पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन जैसे किसी भी आसन में बैठ जाएँ एवं हाथों को घुटनों पर रखकर तर्जनी अँगुली के अग्रभाग को…

Hast Mudra Vigyan Method and Benefits In Hindi

हस्त मुद्रा विज्ञान हमारा शरीर अनंत रहस्यों का भण्डार है। अभी हमें जो विद्याएँ ज्ञात हैं वे उन कैवल्य ज्ञानी परमात्माओं द्वारा प्रदत्त ज्ञान का एक प्रतिशत भी नहीं हैं। यदि हमें उन्हीं एक प्रतिशत का कुछ भाग ज्ञात हो जाए तो हम ज्ञानमद से चूर…

Brahma Mudra Method and Benefits In Hindi

ब्रह्म मुद्रा आकृति: ब्रह्मा के चार मुख के समान। विधि किसी भी ध्यानात्मक आसन (पद्मासन, सुखासन) में बैठे। मेरुदण्ड व धड़ को सीधा कर आँखों को बंद कर लें। हाथ को ज्ञान या चिन मुद्रा में घुटने पर रखें। शांत मनोभाव से इस मुद्रा का अभ्यास करने के…

Yog Mudra Method and Benefits In Hindi

योग मुद्रा विधि पद्मासन में शांतचित्त होकर आँख बंद करके बैठे। प्रारंभिक अवस्था में दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाएँ एवं दोनों पांवों के पंजों को दोनों हाथों की कलाई से पकड़े। श्वास छोड़ते हुए सिर को सामने ज़मीन पर धीरे-धीरे झुकाएँ। माथा…

Bhujangini Mudra Method and Benefits In Hindi

भुजंगिनी मुद्रा वक्त्रं किञ्चित्सुप्रसार्य चानिलं गलया पिवेत्। सा भवेद् भुजङ्गी मुद्रा जरामृत्युविनाशिनी॥ यावच्च उदरे रोगमजीर्णादि विशेषतः। तत्सर्वनाश्येदाशु यत्र मुद्रा भुजङ्गिनी॥ (घे.सं. 3/92-93) अर्थ: मुख को फैलाकर, खोलकर गले से वायु का…

Matangini Mudra Method and Benefits In Hindi

मातंगिनी मुद्रा कण्ठमग्रेजले स्थित्वा नासाभ्यां जलमाहरेत्। मुखान्निर्गमयेत्पश्चात् पुनर्वक्त्रेण चाहरेत्॥ नासाभ्यां रेचयेत्, पश्चात कुर्यादेवं पुनः पुनः। मातङ्गिनी परा मुद्रा जरामृत्यु विनाशनी॥ विरले निर्जने देशे स्थित्वा चैकाग्रमानसः।…

Kaki Mudra Method and Benefits In Hindi

काकी मुद्रा काकचन्चुवदास्येन पिवेद्वायं शनैः शनैः। काकी मुद्रा भवेदेषा सर्वरोग विनाशनी॥ काकी मुद्रा परा मुद्रा सर्वतन्त्रेषुगोपिता। अस्याः प्रसादमात्रेण काकवन्नीरुजो भवेत्॥ (घे.सं. 86-87) अर्थ: कौवे की चोंच के समान मुख बनाकर धीरे-धीरे वायु…

Pashinee Mudra Method and Benefits In Hindi

पाशिनी मुद्रा कण्ठपृष्ठे क्षिपेत्पादौ पाशवद् दृढ़बन्धनम्। सा एव पाशिनी मुद्रा शक्ति प्रबोधकारिणी॥ पाशिनी महती मुद्रा वय:पुष्टि विधायिनी। साधनीया प्रयत्नेन साधकैः सिद्धिकांक्षिभिः॥ (घे.सं. 3/84-85) विधि दोनों पैरों को उठाकर गले के पीछे से…

Ashwini Mudra Method and Benefits In Hindi

अश्विनी मुद्रा आकुंचयेद् गुदाद्वारे प्रकाशयेत् पुनः पुनः। सा भवेदश्विनी मुद्रा शक्ति प्रबोधकारिणी।। आश्विनी परमा मुद्रा गुह्यरोग विनाशनीं। बलपुष्टिकरी चैव अकालमरणं हरेत् ॥ (घे.सं. 3/82-83) विधि सुखासन में तनाव रहित बैठिए। नेत्रों को बंद…

Shambhavi Mudra Method and Benefits In Hindi

शाम्भवी मुद्रा विधि भ्रूमध्य में दृष्टि को स्थिर करके ध्यान पूर्वक परम आत्मा का चिंतन करें। यही शाम्भवी मुद्रा है। सुखासन में बैठ जाएँ। मेरुदण्ड, ग्रीवा एवं सिर एक सीध में रखें। हाथों को एक-दूसरे के ऊपर रख लें या घुटनों पर रखकर ज्ञान…

Manduki Mudra Method and Benefits In Hindi

माण्डुकी मुद्रा मुखं संमुदितं कृत्वा जिह्वामूलं प्रचालयेत्। शनैर्ग्रसेदमृतं तां माण्डुकीं मुद्रिकां विदुः॥ वलितंपलितं नैव जायते नित्य यौवनम्। न केशे जायते पाको यः कुर्यान्नित्यमाण्डुकीम्॥ (घे.सं. 3/74-75) विधि मुख को बंद कर जीभ को तालू में…