गर्भवती स्त्रियों के दस्त का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Diarrhoea During Pregnancy ]

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गर्भवती स्त्रियों के दस्तों के कष्ट में अग्रलिखित औषधियों के प्रयोग से विशेष लाभ होता है —

नक्सवोमिका 6, 30 — दस्त आने की हाजत हर समय बनी रहना, मल-त्याग के बाद भी ऐसा महसूस होना कि यह मल अभी और आएगा; मल-त्याग के बाद राहत मिलती है, किंतु पुनः जाने की इच्छा हो जाती है। दो-तीन बार जाना पड़ता है।

पल्सेटिला 30 — गर्भवती स्त्रियों को खास तौर पर रात को दस्त आए, पनीला या पित्त की तरह हरा-पीला। पहले पेट में गड़गड़ाहट हो, फिर दस्त आ जाए। तरह-तरह के दस्त, दो दस्त एक तरह के न हों। दुर्गन्धयुक्त अपान-वायु निकले जो कभी-कभी रुक कर पेट में दर्द करे। प्यास न होना प्रायः इस औषधि की हर शिकायत में पाया जाता है। गर्भावस्था में प्रतिदिन दो या तीन दस्त हो सकते हैं।

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एसिड फॉस — (2 बूंद हर 4 घंटे बिना दर्द के दस्त आना, दुर्गन्धयुक्त दस्त होना, किंतु बड़े-बड़े सफेद दस्तों के बावजूद इसके दस्तों की विशेषता यह है कि रोगी को कमजोरी महसूस नहीं होती।

पोडोफाइलम 6 — प्रातः काल का डायरिया; दोपहर तक दस्त आते रहते हैं, फिर संध्या को साधारण मल आ जाता है, संध्या में दस्त नहीं आता।

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