कान का दर्द का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Earache, Otalgia ]

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छोटे बच्चों को प्रायः जन्म से कुछ सप्ताह बाद से ही कर्ण (कान) रोगों से पीड़ित होना पड़ता है। बच्चों के कर्ण में शूल होने यो स्राव होने के कारण उसकी मां का गलत तरीके से कराया गया स्तनपान है। जब स्त्रियां छोटे बच्चों को गलत ढंग से गोद में लेकर बिस्तर पर बच्चे के साथ लेटकर स्तनपान कराती हैं, तो प्रायः दूध की कुछ बूंदे बच्चे के कान में भी चली जाती हैं, जिस कारण बच्चे के कान में दूध के साथ बाहर की धूल-मिट्टी चिपकने लगती है। उस गंदगी में रोगों के जीवाणु एकत्र होते हैं और बच्चों के कान में शोथ हो जाता है।

जब बच्चे कान के दर्द के कारण रोते हैं, तो बार-बार वे अपने हाथों से कान का स्पर्श करने का प्रयत्न करते हैं और फिर स्पर्श करते ही अधिक जोर से रोने लगते हैं। कर्ण-शूल में केवल शूल बेधने की तरह तेज दर्द पैदा हो जाता है। यह दर्द कभी-कभी दांत की जड़ तक फैल जाया करता है। सर्दी या चोट लगने, कान को बार-बार कुरेदने, कान में पानी घुसने, कान का मैल और कान की भंसी को इधर-उधर हिलाने, कान में फुसियां या घाव होने आदि कारणों से यह असहनीय दर्द उत्पन्न होता है। खसरा या चेचक के रोग के बाद भी कभी-कभी कर्ण-शूल हुआ करता है।

एकोनाइट 3x — सर्दी लगने या कान में ठंडा पानी जाने के कारण कान में दर्द हो, तो यह औषधि उपयोगी है।

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पल्सेटिला 3 — यदि एकोनाइट से लाभ न हो और कान में गाढ़ा, पीला मवाद निकले, जो लगने वाला न हो। इस औषधि का कान पर विशेष प्रभाव है।

कैमोमिला 6 — बच्चों के कान के असह्य दर्द में यह लाभदायक है। दर्द बहुत होता है, गरम सेक से और बढ़ जाता है, रात में इसमें तेजी रहती है।

बेलाडोना 3 — जो दर्द अकस्मात आए, अत्यंत तीव्र हो, काटता-सा, काने में कील गड़ती-सी लगे। जब पल्सेटिला से काम न चले, तब इसे देकर देखना चाहिए।

हिपर सल्फर 30 — यदि कान में फोड़ा हो जाए, पनीर का-सा स्राव निकले, जिसमें उग्र खट्टी बू आए, या कान का ड्रम फट जाने से दर्द हो।

साइलीशिया 30 — कान के पक जाने से यदि अंदर की हड्डी गल-सड़ जाए; सड़ा, बदबूदार स्राव निकले, जिसमें कान की हड्डी के चूरे भी दिखलाई दें, तब उपयोगी है।

जेलसिमियम 30 — यदि रजोरोध के समय कर्ण-शूल हो, तब इससे लाभ होता है।

ऐकोन 3x — प्रमेह से पैदा हुए कर्ण-शूल में यह लाभदायक है।

आर्निका 3 — चोट लगने के कारण कान में दर्द होने पर दें।

एपिस 3 — कान में डंक मारने की तरह दर्द होने पर प्रयोग करें।

कर्ण-प्रदाह, कर्ण मूल-प्रदाह या कान में मैल होना आदि कारणों से कान में टनक या एक तरह का दर्द होता है। इसका कारण खोज कर चिकित्सा करनी चाहिए। ऐकोन, कैमोमिला, फेरम फॉस, हिपर, मर्क, पल्सेटिला, सल्फर आदि इसकी उत्तम औषधियां हैं।

पल्स 3 सेवन और रुई में कई बूंद मूलेन ऑयल (या प्लैटगो 8) डालकर उसके द्वारा कान का छिद्र बंद रखना, इसका उत्कृष्ट उपचार है। कान हमेशा दर्द करता रहे, तो मर्क 6; कान में कोई चीज गड़ती हो या छिद्र होता है, ऐसे ढंग का दर्द होने पर कैप्सिकम 6; जलन पैदा करने वाले दर्द में आर्सेनिक 3; खोंचा की तरह दर्द में पल्स 3; स्नायुशूल की तरह दर्द में कैमो 6 या बेल 6; टपक जैसे दर्द में बेल 3; डंक मारने जैसे दर्द में एपिस 6; सुई गड़ने की तरह दर्द में कैमो या कैलि कार्ब 6; छिल जाने की तरह दर्द में या कान में चोट लगने के कारण दर्द होने पर आर्निका 3 का प्रयोग करना चाहिए। बच्चों के कान के दर्द की कैमोमिला 3, 12 अच्छी औषधि है। निगलने के समय दोनों कानों में दर्द हो, तो फाइटोलैक्का 3 का प्रयोग करने से लाभ होता है।

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