हाथ की ऐंठन का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Hand Cramps ]

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जेलसिमियम 30 — हाथ कांपते हैं, शरीर की पेशियों पर बस नहीं चलता, कोहनी के अगले हिस्से की पेशियों में ऐंठन होती है। यह ऐंठन की प्रमुख औषधि है। इसके सेवन से लाभ हो जाता है।

जिंकम फॉस 6 — प्रायः पक्षाघात के आरंभ में पीड़ित रोगी की उंगलियों में ऐंठन-सी होती है तथा हाथ-पैर के पक्षाघात में विद्युत की-सी दर्द की चमक उठती है, तब यह औषधि दें।

सल्फ्यूरिक एसिड 6, 30 — टाइप करते या लिखते समय उंगलियों में ऐंठन पड़ जाना, साथ ही बांहों में भी पक्षाघात जैसी ऐंठन का अनुभव हो, तब यह औषधि उपयोगी सिद्ध होती है।

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क्यूप्रम मेटैलिकम 3, 30 — हथेलियों में अकड़न, मांसपेशियों की फुदकन, उनमें झटके से लगना।

आर्निका 30 — हाथ के आरंभिक पक्षाघात में इस औषधि का प्रयोग करने से लाभ होता है।

लैथाईरस 3 — कंप्यूटर पर काम करते हुए, टाइपराइटर पर टाइप करते हुए अथवा कलम से लिखते हुए जब उंगलियां काम न करें, हाथों में ऐंठन हो, तब यह औषधि अत्यंत उपयोगी होती है।

रस-टॉक्स 30 — यदि वात-व्याधि से उंगलियों, हाथों में ऐंठन हो, तो यह औषधि दें।

अर्जेन्टम नाइट्रिकम 3, 30 — हाथों में कोन होता है, उंगलियां ऐंठ जाती हैं, बांहें सुन्न-सी होती प्रतीत हों, तब यह औषधि देनी चाहिए। कुछ ही दिनों में इससे लाभ हो जाता है।

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