पागलपन का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Insanity ]

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जब रक्त का दौर सिर की तरफ बहुत ज्यादा हो जाए, तब पागलपन की अवस्था आ जाती है। पागलपन की अवस्था में वह बहुत बोलता है। उसकी बोलचाल में और काम करने में बहुत तेजी आ जाती है। वह बड़बड़ाता है, जिसका कुछ मतलब नहीं होता। उसे ऐसे काल्पनिक भयंकर दृश्य दिखलाई देते हैं, जिनसे जान बचाने के लिए वह इधर-उधर छिप जाना चाहता है। जब उसका पागलपन उत्कट-उन्माद का रूप धारण कर लेता है, तब यह तोड़-फोड़, मार-काट, गाली-गलौज करता है। दूसरों पर थूकता है, दांत किटकिटाता है। ये सब पागलपन के ही लक्षण है। इसकी औषधियां निम्नलिखित हैं —

हायोसाएमस 30, 200 — हल्के ढंग का उन्माद-रोग, हंसने या गाने की तीव्र इच्छा, हंसी-खेल के साथ थोड़ा प्रलाप, बोलने की बहुत इच्छा, कभी-कभी मौन-भाव, निर्लज्जता, नंगे हो जाना या लिंग दिखाना, कामोन्माद, पेशियों की सिकुड़न के साथ बेचैनी, ईष्र्या, देवताओं की भक्ति-भाव से प्रार्थना करना, गाना इत्यादि धर्मोन्मत्तता, एक ही विषय को बराबर कहना, कोई दूसरी बात नहीं।

बेलाडोना 1X, 30 — तेज प्रलाप वाले लक्षण मिले रोग में इसका प्रयोग करना चाहिए। आंख की पुतली फैली, निश्चल और भयावह दृष्टि, बीच-बीच में क्रोध प्रकट करना (नए उन्माद रोग में जैसे तेज प्रलाप, बेचैनी, हिंसा, मानसिक अवस्थाओं का जल्दी-जल्दी बदलना, समीप के लोगों को मारना या काटने को दौड़ना; सीटी बजाना, उछलकर चलना, नाचना; चेहरा लाल, नाड़ी पूर्ण और उछलती हुई)। डॉ० टैलटक का कथन है कि मस्तक भारी और सिर में दर्द मालूम होने पर बेलाडोना 1X या 2 देनी चाहिए और धातु-दोष के कारण उत्तेजना में बेलाडोना 3x या 30 देना उचित है।

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स्टैमोनियम 3x — बहुत अधिक क्रोध का भाव या डर भरे, डराने वाले उन्माद रोग के लक्षण में यह औषधि लाभ करती है। डराने वाली काल्पनिक चीजें देखना (जैसे सर्प या चूहे देखना, भूत की बातें सुनना); काल्पनिक विपत्ति से बचने के लिए इधर-उधर दौड़-धूप करना; बहुत अधिक क्रोध; रोशनी और साथी पाने की लालसा, आत्मगरिमापूर्ण भाव।।

मेलिलोटस 3, 6 — रोगी भाग जाना चाहता है, आत्मघात करना चाहता है और जो भी उसे पकड़ने आते हैं, उन्हें मार डालने की धमकी देता है। उसे ऐसा लगता है। कि उसके पेट में भूत बैठा है और रोगी जो कुछ करना चाहता है वह भूत उस सब कुछ की मनाही कर देता है। स्त्री रोगी छिपती फिरती है, सोचती है कि लोग उसकी ओर देख रहे हैं। डरती है, ऊंचा नहीं बोलती कि कोई उसकी बात सुन न ले। उसे निद्रा नहीं आतीं। इसका प्रधान लक्षण है-अपने को मार डालने के लिए किसी तरह निकल भागना।

नक्सवोमिका 30 — उन्निद्र-रोग होने पर; मानसिक उत्तेजना से पागलपन।

पल्सेटिला 30 — ऋतु-धर्म दब जाने पर पागलपन हो, तो दें।

सीपिया 200 — ऋतु-धर्म में अत्यधिक स्राव होने पर पागलपन का होना।

कैल्केरियो कार्ब 200 — डॉ० कॉक के कथनानुसार जब रोगी अनुभव करे कि उसकी इंद्रियां उसका साथ छोड़ती-सी प्रतीत होती हैं, अत्यंत निराशा तथा मानसिकअवसाद आ घेरे, तब सोते समय इस औषधि की 1 मात्रा दें।

वेरैटूम एल्बम 30 — रोगी को वस्तुएं तोड़ने, फाड़ने काटने का पागलपन सवार हो जाता है। वह कपड़े फाड़ डालता है। अश्लील बातें करता है। इन लक्षणों में यह औषधि प्रयोग करें।

कैनाबिस इंडिका 1X — भ्रमपूर्ण विश्वास और अवास्तविक या काल्पनिक चीजें देखना-यह दोनों विचार बराबर की प्रकृति होने पर भी हमेशा बदला करते हों, सब कामों में ज्यादती, देशकाल का अधिक ज्ञात होना (जैसे, एक मिनट का समय एक वर्ष मालूम होता हो या पास की चीज दूर रखी मालूम होती हो), शांत प्रकृति वाले लोगों के उन्माद रोग में लाभकारी है।

सल्फर 30 — पुराने उन्माद रोग में लाभ करती है। माथा गरम, हाथ-पैर ठंडे, कलह-प्रियता, एक ही विषय में भ्रांत विश्वास, धर्मोन्मत्तता, अहंकार, सब पदार्थों में बदबू महसूस करना।

प्लैटिना 30 — रोगी अपने को बहुत बड़ा समझता है, अत्यंत घमंडी, दूसरों को निहायत छोटा, कीट-पतंग के समान। जब वह घर में प्रवेश करता है, तब उसे सब चीजें छोटी दिखती हैं, घर के लोग भी छोटे और बौने दिखाई देते हैं। उसकी मानसिक दृष्टि अदलती-बदलती रहती है। एक प्रसिद्ध डॉक्टर का कहना है कि उसने इन्हीं लक्षणों पर कई रोगियों को ठीक किया था।

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