विभिन्न प्रकार के पक्षाघात का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Treatment For Paralysis of Different Types ]

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मानसिक गड़बड़ी के कारण पक्षाघात — आर्निका, इग्नोशिया, नैट्रम-म्यूर, स्टैनम्।

शारीरिक परिश्रम के कारण पक्षाघात — आर्सेनिक, आर्निका, रस-टॉक्स।

आक्षेप आदि के कारण पक्षाघात — आर्सेनिक, कॉस्टिकम, काक्युलस, क्रूपम मेट, हायोसियामस, नक्सवोमिका, प्लम्बम, सिकेलि, साइलीशिया, स्टैनम।

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संन्यास रोग के बाद पक्षाघात — आर्निका, एनाकार्ड, बैराइटी कार्ब, कॉस्टिकम, लैकेसिस, प्लम्बम, सिकेलि, स्टैमो।

सर्दी लगकर पक्षाघात — आर्निका, कॉस्टिकम, कोलचिकम, डल्कामारा, मर्क सोल, रस-टॉक्स।।

पानी में भीगकर पक्षाघात — कोलचिकम।

हस्तमैथुन आदि शुक्रक्षय के कारण पक्षाघात — चायना, कौक्युलस, फेरम फॉस, नैट्रम म्यूर, नक्सवोमिका।।

वात-जनित पक्षाघात — आर्निका, बैराइटी कार्ब, कैंथर, कॉस्टिकम, चायना, जेलसिमियम, लाइकोपोडियम, रूटा।

सविराम ज्वर के बाद पक्षाघात — आर्निका, आर्सेनिक, लैकेसिस, नैट्रम म्यूर, नक्सवोमिका, रस-टॉक्स।।

टाइफॉयड के बाद पक्षाघात — क्रूप्रम मेट, काक्युलस, नक्सवोमिका, एसिड सल्फ।

डिप्थीरिया के बाद पक्षाघात — आर्सेनिक, जेलसिमियम, लैकेसिस, नैट्रम म्यूर।

हैजा के बाद पक्षाघात — कूप्रम मेट, सिकेलि कोर, सल्फर, वैरेट्रम विरिड इत्यादि का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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