Shambhavi Mudra Method and Benefits In Hindi

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शाम्भवी मुद्रा

विधि

भ्रूमध्य में दृष्टि को स्थिर करके ध्यान पूर्वक परम आत्मा का चिंतन करें। यही शाम्भवी मुद्रा है।
सुखासन में बैठ जाएँ। मेरुदण्ड, ग्रीवा एवं सिर एक सीध में रखें। हाथों को एक-दूसरे के ऊपर रख लें या घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बना लें। अब पूर्ण एकाग्रचित्त होकर दृष्टि दोनों भौंहों के बीच करें और अपनी शुद्धात्मा का ध्यान करें।
विशेष: आँखों में दर्द महसूस हो तो विराम करें। आँखों में पानी के छींटे डालें या फिर पहले आँखों के अन्य अभ्यास कर लें।
समय: श्वास सामान्य रखते हुए अनुकूलतानुसार करें।

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लाभ

  • आज्ञा चक्र विकसित होता है।
  • अचेतन मस्तिष्क जागृत होता है।
  • आँखों में आकर्षण पैदा होता है।
  • ध्यान शक्ति का विकास होता है।
  • स्मरण शक्ति तीक्ष्ण होती है।
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