What Are the Symptoms of Bursitis?(बर्साइटिस के लक्षण , उपचार)

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बर्साइटिस
जोड़ का अत्यधिक प्रयोग करने पर हमें बर्साइटिस नामक बीमारी का सामना करना पड़ता हैं। यह एक प्रकार की जोड़ो में होने वाली बीमारी हैं, जो हमारे चलने वाले भाग में जैसे घुटनो में ,मांसपेशियों में, स्नायु या त्वचा के बीच कुशन का काम करती हैं। जोड़ का अत्यधिक प्रयोग करने पर हमें बर्साइटिस हो जाता हैं। बर्सा तरल से भरी हुई छोटी सी थैली होती हैं। बर्साइटिस चोट लगने के वजह से भी हो जाते हैं। बर्सा में सूजन आने की वजह से बर्साइटिस हो जाता हैं। यह ज्यादातर केहुनी और घुटनो में होता हैं। लंबे समय तक किसी कठोर सतह पर बैठने पर हमारी घुटनो में दर्द होता हैं ,और यही से बर्साइटिस नामक बीमारी शुरू हो सकता हैं। प्रतिदिन यही लंबे समय तक बैठने की गतिविधिया, और जोड़ो पे जोड़ देने से इस रोग के होने का जोखिम बढ़ा देते हैं। बर्साइटिस में दर्द और सूजन शामिल है। हम एक्स -रे और शारीरिक जाँच करवा के बर्साइटिस का पता कर सकते हैं। बर्साइटिस में दर्द की दवा, विश्राम , या बर्फ का प्रयोग करके इसका उपचार करते हैं। यदि इन प्रयोग से सुधार नहीं होते हैं , तो हमें दर्द इंजेक्शन भी लेना पड़ता हैं। व्यापक रूप से पूरी दुनिया में 5000 से 1 लाख मरीज बर्साइटिस के देखने को मिलते हैं। जोड़ का अत्यधिक प्रयोग करने पर हमें बर्साइटिस नामक बीमारी का सामना करना पड़ता हैं। यह एक प्रकार की जोड़ो में होने वाली बीमारी हैं, जो हमारे चलने वाले भाग में जैसे घुटनो में , मांसपेशियों में, स्नायु या त्वचा के बीच कुशन का काम करती हैं। जोड़ का अत्यधिक प्रयोग करने पर हमें बर्साइटिस हो जाता हैं। बर्सा तरल से भरी हुई छोटी सी थैली होती हैं। बर्साइटिस चोट लगने के वजह से भी हो जाते हैं। बर्सा में सूजन आने की वजह से बर्साइटिस हो जाता हैं। यह ज्यादातर केहुनी और घुटनो में होता हैं। लंबे समय तक किसी कठोर सतह पर बैठने पर हमारी घुटनो में दर्द होता हैं , और यही से बर्साइटिस नामक बीमारी शुरू हो सकता हैं। प्रतिदिन यही लंबे समय तक बैठने की गतिविधिया, और जोड़ो पे जोड़ देने से इस रोग के होने का जोखिम बढ़ा देते हैं। बर्साइटिस में दर्द और सूजन शामिल है। हम एक्स -रे और शारीरिक जाँच करवा के बर्साइटिस का पता कर सकते हैं। बर्साइटिस में दर्द की दवा ,विश्राम , या बर्फ का प्रयोग करके इसका उपचार करते हैं। यदि इन प्रयोग से सुधार नहीं होते हैं , तो हमें दर्द इंजेक्शन भी लेना पड़ता हैं।
बर्साइटिस के लक्षण
१) सूजन हो जाना।
२) लाली हो जाना।
३) कठोरता।
४) ज्यादा छोट लग जाना।
बर्साइटिस के कारण
१) कठिन सतह पर बैठे।
२) लंबे समय तक केहुनी पे झुकाव।
३) बार -बार सिर पर कुछ फेंकना।
४) लंबे समय तक बैठे रहना।
बर्साइटिस से बचाव
१) लगातार ब्रेक लेना।
२)वजन कण्ट्रोल में रखना।
३)मांशपेशियों को मजबूत रखना।
४)घुटना टेककर पैड का उपयोग करना।
बर्साइटिस में निम्न दवा का प्रयोग करे
१) Arnica 200 – 4 Drops / twice -कोई भी चोट लगे तो इस दवा का उपयोग करते है। अगर बच्चो में ये परेशानी है तो उन्हें 2 Drops दे।
२) Belladonna 200 – 4 Drops / twice – इसमें दर्द रहता है , और उस जगह पर गर्मी लगेगी, टपटप करेगा , तब हम इस दवा का उपयोग करते है। अगर बच्चो में ये परेशानी है तो उन्हें 2 Drops दे।
३) Bryonia 30 – 4 Drops / thrice – इसमें अगर आप एक जगह बैठे हैं तो ठीक हैं , लेकिन जहां आप चलने लगे तो दर्द बढ़ जायेगा और इसमें जीभ उजला रहता हैं। तब आप इस दवा का उपयोग करे।
४) Kalmia Q -10 Drops/thrice -जैसे आपके घुटना में चोट लगी हैं और उसका direction ऊपर से नीचे हो गया , इसी तरह अगर आपके कंधे में चोट लगे हैं और इसका direction ऊपर से नीचे हो गया तो हम इस दवा का उपयोग करते हैं।
५) Rhus Tox 200 – 4 Drops /twice – इसमें आप बैठे रहेंगे तो दर्द करेगा, और जैसे ही आप चलना शुरू करेंगे तो ठीक हो जायेगा और वो जगह टाइट रहेगा। तब आप इस दवा का उपयोग कर सकते हैं।
५) Ruta 200 – 4 Drops /twice -इस दवा का उपयोग हम तब करते हैं जब Arnica 200 से हमारी बीमारी 70% ठीक हो जाती हैं , और 20% ठीक करना होता हैं।
६) Sanguinaria Can 200 – 4 Drops /twice -इस दवा का उपयोग हम तब करते हैं जब हमारे जोड़ो में दर्द रहती हैं , और राइट साइड इफेक्ट करता, गाल लाल हो जाती हैं , और वो माइग्रेन के मरीज होते हैं।
७) Ferrum Met 200 – 4 Drops /twice – इस दवा का उपयोग हम तब करते जब हमारे लेफ्ट साइड इफेक्ट होते हैं, और जोड़ो में दर्द रहती है।
इन दवा का उपयोग करके हम इस बीमारी से निजात पा सकते हैं।

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