BELLADONNA Homeopathic Medicine Treatment and Side Effects In Hindi

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बेलाडोना (Belladonna)

(डेडला नाइटशेड)

बेलाडोना स्नायुमण्डल के सभी भागों पर काम करता है, वहाँ रक्त-संचय करता है, प्रचण्ड उत्तेजना लाता है, ज्ञानेन्द्रियों की क्रियाओं में उलट-फेर करता है । फड़कन, अकड़न और दर्द भी है । इसका स्पष्ट कार्य रक्त-बाह्य, नाड़ी-मण्डल, चर्म और ग्रन्थियों पर भी होता है । बेलाडोना में सदा गरम लाल चर्म, लाल चेहरा, चमकती आँखें, गर्दन की बड़ी रग में फड़कन आती है । उत्तेजित मानसिक अवस्था । सभी इन्द्रियाँ उत्तेजित, अशांत । निद्रा, अंग फड़कना व कड़ापन, मुँह का और गले का सूखापन, पानी से घृणा के साथ स्नायविक शूल जो तेजी से उठे और गायब हो जाये आदि लक्षण हैं । गरमी, लाली, थरथराहट और जलन । बच्चों की उचित दवा । मिर्गी का दौरा और फिर मिचली की दवा है । अरुण-ज्वर पाये जाते हैं यह उसका प्रतिषेधक भी है । यहाँ 30 शक्ति का प्रयोग कीजिए । बहिःनिस्सृत चक्षु गोलक तथा हृदयस्पन्दन के साथ गलगण्ड । वायुयान चालकों को ‘वायु-रोग’ इसके लक्षणों से मिलता-जुलता है । उन्हें यह रोग रोकने के लिए दीजिए । प्यास, चिन्ता या भय, इनमें नहीं पाया जाता । बेलाडोना में तीव्रता पूर्वक और एकाएक आक्रमण पाया जाता है । चुल्लिकाधार की विषैली अवस्था में 1x प्रयोग करना चाहिए (बीब) ।

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मन — रोगी अपनी ही दुनिया में रहता है । भूत-प्रेत से घिरा हुआ, चारों तरफ के वातावरण की वास्तविकता से अनभिज्ञ जबकि आँखों का पद वास्तविक चीजें ग्रहण नहीं कर सकता । काल्पनिक वस्तुओं के झुण्ड उसके चारों तरफ घूमते-फिरते हैं । रोगी केवल इन्हीं दृश्यों और विलक्षण भ्रमों के संसार में विचरता रहता है । दृष्टि-भ्रम, भयानक देव, भयानक रूप देखता है । प्रलाप । डरावना आभास । प्रचण्ड, क्रोधित, दाँतों से काटता है, मारता है, भाग निकलना चाहता है । अचेतना, बात-चीत करना पसन्द न करें ।

सिर — चक्कर, इसके साथ पीछे या बायीं बगल से गिरना । जरा भी छूये जाने से बहुत संवेदनायें । बहुत थरथराहट और गरमी । धड़कन, सिर में गूँज, साँस की तंगी के साथ । दर्द, भारीपन खासकर माथे में, कनपटी और गर्दन के पिछले भाग में भी । नजले का स्राव दबने से आया सिर का दर्द । एकाएक चीख मारे । दर्द, जो रोशनी, आवाज, धक्के, लेटने से और तीसरे पहर बढ़े, दाब से और ओठंग कर लेटने से कम हो । तकिये में सिर गढ़ाये, पीछे ओठंगा हुआ और करवटें बदले । बराबर कराहना । बाल टूटें और झड़ें, सिरदर्द दाहिनी तरफ और लेटते समय अधिक । बाल कटवाने से आया बुरा असर, सिरदर्द, जुकाम इत्यादि ।

चेहरा — लाल, नीलिमा युक्त, गरम, सूजा हुआ, चमकीला, चेहरे की पेशियों में झटके आयें । ऊपरी होंठ की सूजन । चेहरे का स्नायुशूल, पेशी फड़कन और लाली के साथ ।

आँखें — लेटने पर गहराई तक थरथराहट । पुतली फैली हुई (ऐग्नस) । आँखें सूजी हुई और बाहर उभरी मालूम पड़े, घूरना, चमकीली, पुतली का सफेद भाग लाल, सूखी, जलन, रोशनी असह्य, आँखों में तेल चिलकन । आँखों के ढेले बाहर निकलें । दृष्टिभ्रम, चमकीली चीजें दिखाई दें । द्विदृष्टि, ऐंचापन, पलकों की अकड़न । मालूम पड़े कि आँखें आधी बन्द हैं । पलक सूजी हुई । तलदेश में रक्त संचित हो ।

कान — बीच और बाहरी कान में फटन दर्द । भिनभिनाहट की आवाजें । पद बाहर को उठा हुआ । काम ग्रन्थियाँ सूजी हुई । तेज स्वर असह्य । सुनने की शक्ति बहुत तेज । बिचले कान का प्रदाह । कान पीड़ा से प्रलाप हो । बच्चा सोते में चिल्ला उठता है । कान की गहराई में टपकन और चोट पड़ने की तरह का दर्द, दिल की धड़कन के साथ-साथ हो । कान के भीतर का रक्तार्बुद । कर्ण-गलनली का तीव्र और अर्द्ध तीव्र रोग । कानों में अपनी ही आवाज गूंजना ।

नाक — काल्पनिक महक आये । नाक के सिर पर टपकन । लाल और सूजी हुई । नकसीर, उसके साथ चेहरा लाल । जुकाम, खून मिली श्लेष्मा ।

मुँह — सूखा, दाँतों में टपकन के साथ । मसूढ़ों का फूलना । जुबान के किनारे लाल । गोल, सूजी हुई जुबान । दाँत पीसना । जुबान सूखी हुई और दर्दीली । हकलाना ।

गला — सूखा, पालिस किया जैसा सुख, सूजन (जनसेंग) लाल, दाहिनी तरफ अधिक । तालुमूल बढ़े हुए । गले में घुटन मालूम पड़े । निगलने में कठिनाई, तरल पदार्थों का निगलना कठिन । ढोके जैसा संवेदन । गले का छिद्र सूखा, सिकुड़ा मालूम दे । गले में आक्षेप । बराबर निगलते रहना चाहे, खुरचन । निगलने की पेशियाँ बहुत उत्तेजित, श्लैष्मिक झिल्लियों का बढ़ना ।

आमाशय — अरुचि । दूध और माँस से घृणा । कौड़ी प्रदेश में आक्षेपिक दर्द । सिकुड़न, दर्द रीढ़ तक दौड़े, मिचली और कै । ठंडे पानी की तीव्र प्यास । आमाशय में झटके । खाली मिचली, तरल पदार्थ से आतंकित । आक्षेपिक हिचकी । तरल पदार्थ पीने का भय । कै, किसी तरह न रुके ।

उदर — तना, गरम । बड़ी आड़ी-तिरछी आँत गद्दी की तरह ऊपर उठी हो । कोमल सूजा हुआ । दर्द जैसे हाथ से कस के पकड़ा हो, झटका, दाब से कष्ट बढ़े । आर-पार कटन दर्द, बायीं तरफ चिलकन, जो खाँसते, छींकते, छूते समय बढ़े । छूना असह्य, बिस्तर का कपड़ा भी स्पर्श किया जाना सहन न हो (लैकेसिस) ।

मल — पतला, हरा, मरोड़ के साथ, खड़िया की तरह ढोंके । मल — त्यागने के समय कम्पन । मलान्त्र में चुभन दर्द, आक्षेपिक सिकुड़न एकाएक रुकना । बवासीर, पीठ दर्द के साथ । काँच निकलना (इग्नेशिया, पोडोफा.) ।

मूत्र — रुकना । तरुण संक्रामकता, मूत्राशय में कीड़े रेंगने जैसा संवेदन । पेशाब थोड़ा, अधिक कूंथन के साथ, गहरा, गंदला, चूना अधिक मिला हो । मूत्राशय बहुत कोमल । बिना इरादा, रुक-रुक कर बूंद गिरें । अक्सर और अधिक मात्रा में हो । खून का पेशाब, जब रोग का कोई कारण न मिले । मूत्र-ग्रन्थि का बढ़ना ।

पुरुष — अण्ड कड़े, ऊपर खिंचे और सूजे हुए । रात में जननेन्द्रिय पर पसीना आये । प्रोस्टेट ग्रन्थि से रस बहना । इच्छा की कमी ।

स्त्री — कोमल, नीचे धंसना । मानो पेट की सभी चीजें योनि की राह बाहर निकल जायेंगे । योनि का सूखापन और गरम लगना । कमर की चारों तरफ खींच । त्रिकास्थि में दर्द । मासिक धर्म अधिक मात्रा में हो, खून गहरा लाल, समय से पहले । रक्तप्रदाह गरम । कटि के आर-पार दर्द । मासिक स्राव और प्रसवांत स्राव दुर्गन्धित और गरम । प्रसव वेदना एकाएक उठे और गायब हो जाये । स्तन-प्रदाह में दर्द-टपकन, लाली, घुण्डी-सुखों की लकीरें जो चारों तरफ फैलें । स्तन भारी लगें, कड़े और लाल हों, स्तनों का अर्बुद, लेटने पर दर्द बढ़े । अत्यन्त दुर्गन्धित रक्त प्रदाह, गरम खून गिरना । प्रसवांतक स्राव की कमी ।

श्वास-यन्त्र — नाक, गला, स्वरनली, कण्ठनली सभी का सूख जाना । गुदगुदीदार छोटी सूखी खाँसी, रात में अधिक । स्वरनली दर्दीली । साँस कष्टदायक, तेज असमान (कीकेन ओपियम) बिना दर्द के गला बैठना । खाँसी और बायीं कमर में दर्द । काली खाँसी खाँसने के पहले आमाशय में दर्द, इसके साथ खून थूके । खाँसते समय सीने में चिलकन । स्वरनली बहुत दर्दीली मानो कोई बाहरी चीज अटक गयी हो, खाँसी के साथ । तेज महीन आवाज । हर साँस में कराहना ।

दिल — तीव्र धड़कन सिर में गूंजें, साथ में कठिन साँस । जरा-से परिश्रम पर दिल धड़कना । शरीर भर में थरथराहट । नाड़ी की दोहरी चाल । दिल बहुत बड़ा मालूम दे । तेज मगर कमजोर नब्ज ।

अंग — अंगों में गोली लगने की तरह का दर्द । जोड़ सूजे हुए, लाल, चमकीले लाल लकीरें चारों तरफ फैलें । लड़खड़ाती चाल । जगह बदलने वाला वात दर्द । प्रसव के बाद जंघा शिरा का प्रदाह । अंग में झटके, अकड़न, अनिश्च्छित लँगड़ाना ।

पीठ — गरदन कड़ी, तनी । गरदन की ग्रन्थियों की सूजन । गरदन की जड़ में दर्द, मानो टूट जायेगी । मोहरों पर जरा भी दाब असह्य, दर्द पैदा करें । कटिवात, कमर और जाँघों में दर्द ।

चर्म — सूखा और गरम, सूजा हुआ, कोमलग्राही, अंगारे जैसा गरम, चिकना, अरुण ज्वर की तरह दाने, एकाएक फैले । रश्मि, चेहरे पर दाने । ग्रन्थियाँ सूजी हुई, कोमल और लाल । फोड़े, मवाद के बाद आया कड़ापन । विसर्प ।

ज्वर — तीव्र ज्वर की अवस्था मगर ताप के अनुसार रक्त विष का अभाव । खलन, तीखा, भाप निकलना, गरमी । पैर बरफ जैसे ठण्डे । सतह की रक्त नलियाँ तनी हों, केवल सिर सूजा शेष शरीर पर पसीना आए । ज्वर बिना प्यास के ।

नींद — बेचैनी से चिल्ला उठना, दाँत पीसना । रक्त नलियों की धड़कन से जागा करे, नींद न आये । सोते में चिल्ला उठता है । अनिद्रा, औंघाई के साथ । आँख बन्द करते ही या नींद आते ही चिहुँक उठे । हाथों को सिर के नीचे करके सोना । (आर्स, प्लैटी)

घटना-बढ़ना — बढ़ना: छूने से झटका, आवाज, बाहरी हवा, तीसरे पहर, लेटने पर ।

घटना — लेटने के बाद उठने पर ।

सम्बन्ध — तुलना कीजिए: सैंग्विसोर्बा — औफिसिनैलिस 2x-6x, रोजेसिया कुटुम्ब की दवा है (मासिक रजः मात्रा में अधिक और अधिक देर तक आने वाला खासकर स्नायविक रोगियों में, सिर और अंगों में रक्त संचित होने के लक्षणों के साथ) । वयःसन्धिकाल में स्वतः रक्तस्राव । जीर्ण जरायु प्रदाह । फुफ्फुस से रक्तस्राव । नसों का फूलना और घाव । मन्ड्रागोरा — मैनड्रेक (प्राचीन लोगों की नशे की एक वस्तु) बेचैन, उत्तेजित और शारीरिक दौर्बल्य, सोने की इच्छा । चायना और अफेनिया की तरह सामयिकता नष्ट करता है । मिर्गी रोग और जल-भय रोग में लाभदायक है, सेटोनिया भी (ए. ई. लेविन) ।

हायोस — (ज्वर कम मगर घबराहट अधिक) । स्ट्रेमो. (उससे अधिक स्नायविक उत्तेजना, अति जोश, होइजिया-मैक्सिको की एक वनस्पति), बेलाडोना की तरह काम करती है, ज्वर, लाल दाने, चेचक, पित्ती इत्यादि में लाभदायक । तेज ज्वर जिसमें दाने निकलें, गला और मुँह सूखा, लाल चेहरा, सूजी आँखें, प्रलाप । अक्सर बेलाडोना के बाद कैल्के. की आवश्यकता होती है । एट्रोपिया, यह बेलाडोना का खार है (गले का बहुत सूखापन, निगलना प्रायः असमय । जीर्ण आमाशय पर तेज दर्द और खाये हुए भोजन की कै । प्रदाह सभी प्रकार के दृष्टि भ्रम । सभी चीजें बड़ी मालूम पड़ें), प्लैटिना इसका उल्टा है । हाइपोक्लोराइड्रिया, तेजाबी पानी मुँह में आना । सभी चीजों पर सोचता रहे (विचार ग्रस्त) पढ़ते समय अक्षर आपस में गिचपिचा जायें, द्वि-दृष्टि, सभी चीजें लम्बी दिखाई दें । कम्बुकर्णी नली और कर्णपटल में रक्त संचयता । क्लोम ग्रन्थि से आकर्षण है । आमाशय की अम्लता, आमाशय शूल के हमले, डिम्बाशय में स्नायु शूल ।

गैर होम्योपैथी प्रयोग — एट्रोपिया और उसके दूसरे लवण आँखों के रोग में व्यवहार किये जाते हैं, जैसे पुतली को फैलाने के लिए और दृष्टि पेशियों को सुन्न करने के लिए ।

आंतरिक या सुई द्वारा प्रयोग करने से यह अफीम के विष को मारता है । फाइसोस्टिग्मा और प्रुसिका एसिड । मादक विष और कुकुरमुत्ता विष मारने के लिए । गुर्दों का शूल एक ग्रेन का 1/200 पिचकारी द्वारा ।

आंत्रिक रुकावट में जिसमें जान जाने का भय हो । एक मिलिग्राम या उससे अधिक, चर्म के नीचे इन्जेक्शन देना चाहिए ।

1/80 ग्रेन-सुई द्वारा तपेदिक के रात-पसीना में ।

1/20 ग्रेन-दर्दनाशक एक ग्रेन अफीम का तोड़ है ।

स्थानीय सुन्नता लाने के लिए, अड़चन की हालत में और स्राव जैसा दूध इत्यादि सुखाने के लिए उपयोगी है । सुई द्वारा तपेदिक के रात-पसीना में 1/80 ग्रेन ।

मात्रा — एट्रोपिया सल्फ 1/220 से 1/60 ग्रेन तक ।

बेलाडोना के शामक — कैम्फ., कॉफिया, ओपियम, एकोन. ।

पूरक — कैल्केबेलाडोना (चूना मिला रहता है), खासकर अर्द्ध जीर्ण और वंशगत रोगों में ।

बेमेल — एसेटि. एसिड ।

मात्रा — 1-30 शक्ति और ऊंची । तीव्र रोग में दोहराना आवश्यक ।

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