मुष्कत्वक प्रदाह का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Scrotitis ]

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जिस चमड़े (त्वचा) की थैली से पुरुष के दोनों अंड ढके हैं, उसी का नाम मुस्कत्वक (Scortum) है। प्रदाह होने पर यह मुष्कत्वक फूला, काला और बाहर से घावयुक्त दिखाई देता है। कभी-कभी रोगी को जोड़ा लगकर तीव्र ज्वर हो आता है। जिह्वा सूखी और काली आभा लिए; प्रलाप, सड़न (Mortification) आदि उपसर्ग दिखलाई देते हैं।

मुष्कत्वक फूला, अकड़ा और डंक मारने की तरह दर्द में या गर्मी सहन न होने पर एपिस-मेल 3x, 6; सड़ने की तैयारी या सड़ने की अवस्था में, आर्सेनिक एल्बम 3x को लगभग एक महीने तक अवश्य ही सेवन कराई जानी चाहिए। कितनी ही बार साइलीशिया 30, 200 का प्रयोग करके भी स्पष्ट लाभ होता देखा गया है। जो भी हो, यह रोग हो जाने पर चिकित्सा में देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि देर करने से रोगी का अनर्थ ही होता है।

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