सामुद्रिक रोग का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Sea Sickness ]

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किश्ती, मोटर बोट या शिप में यात्री करते समय किसी-किसी को बेहद मिचली और वमन हो जाता है। रोगी डेक पर खड़ा नहीं हो सकता, समुद्र की लहरों को नहीं . देख सकता, सिर ऊंचा नहीं कर सकता। बैठने या उठने पर वमन आरंभ हो जाता है, इसे ही “सामुद्रिक-रोग” कहते हैं। यह रोग प्रायः हर किसी को नहीं होता। स्नायु-प्रधान लोगों को ही यह रोग होता है। किसी-किसी को किश्ती (नाव) में, पानी की ऊंची-नीची तरंगों पर चलती हुई किश्ती में घूमने के समय अथवा किसी भी तरह के वाहन में चढ़कर घूमने के समय इस प्रकार वमन हो जाया करता है। इस तरह के वमन के साथ सिर चकराना, मिचली और औंकाई, प्रबल शारीरिक अवसाद, पेट में खालीपन का एहसास होना और सिरदर्द आदि भी हो जाता है।

एकोनाइट 30 — यदि समुद्र-भ्रमण में भय की उत्पत्ति हो, तब इसकी कुछ मात्रा देनी चाहिए।

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एण्टिम टार्ट 6, 30 — एकाएक पेट में दबाव मालूम होना, वर्मन, सुस्ती, मिचली आदि के आरंभ हो जाने में यह दें।

कौक्युलस 6, 30 — समुद्र-यात्रा में यदि रोगी को सामुद्रिक-अस्वस्थता का अंदेशा हो, तो यात्रा आरंभ करने से पहले तीन-चार दिनों पहले से इस औषधि का सेवन करते रहने से यात्रा में फिर तबियत बिगड़ेगी नहीं और यात्रा सुखद होगी। समुद्र-यात्रा के समय यदि कब्ज हो जाए या मिचली या वमन हो, सिर में चक्कर आए और सिर घूमता-सा प्रतीत हो, पेट में ऐंठन मालूम हो, तो यह औषधि बहुत लाभ करती है।

ब्रायोनिया 30 — यदि रोगी समुद्र की यात्रा से परेशान और बेचैन हो जाता हो और चुपचाप, बिना हिले-डुले पड़ा रहना उसे ठीक लगता हो, तो उसे यह औषधि देनी चाहिए।

कॉफिया 200 — समुद्र-भ्रमण से रोगी के सिर में दर्द हो, पेट में भी कष्ट होता रहे, लगातार वमन आने की प्रवृत्ति बनी रहे, औंकाइयां आएं, तब यह औषधि लाभ करती है।

एपोमार्फस 6 — समुद्र-यात्रा में वमन होना, जी मिचलाना, सिर में चक्कर आएं, तब यह दें।

नक्सवोमिका 6 — खट्टा वमन, पाकाशय में दबाव मालूम होना, सिर में दर्द और चक्कर आते रहना, जी का मिचलाने लगना, मन कच्चा-कच्चा होता है, नाड़ी चंचल रहती है, सहज में ही कलेजा धड़कने लगता है, हुत्पिण्ड कमजोर होता है, तब यह औषधि उपयोगी सिद्ध होती है।

बोरेक्से 3x — यदि समुद्र-भ्रमण में लहरों के बीच जहाज के लहरों पर ऊपर-नीचे डोलने से भय लगता हो, जी मिचलाता और उल्टी आती हो, डेक पर जाने से ही भय लगता हो, तब यह औषधि उपयोगी है।।

पेट्रोलियम 30, 200 — समुद्र-यात्रा के समय जी मिचलाने की यह उत्तम औषधि है। रोगी को औंकाई आती हैं, वमन हो जाता है, सिर में चक्करों की भरमार रहती है, सिर की गुद्दी में दर्द होता है, तब समुद्र-यात्रा करने से पहले ही इस औषधि का प्रयोग आरंभ कर देना चाहिए।

स्टैफिसेग्रियो 6 — सिर में चक्कर, उबकाई, वमन, सिगरेट, तंबाकू और बलकारक पदार्थ से अनिच्छा, चक्करों के कारण उसे लगता है कि यदि वह किसी चीज को पकड़ नहीं लेगा, तो यकीनन गिर पड़ेगा, ऐसे में इस औषधि से लाभ होता है।

सेनिक्युला 3, 6 — जहाज के डेक पर रहने की इच्छा, ऊपर की ओर देखने पर मिचली का बढ़ जाना, ठंडी चीजें खाने की इच्छा, ठंडा पानी पीने से चक्करों का घट जाना आदि लक्षणों में यह औषधि देनी चाहिए। यदि रोगी यात्रा के पहले से ही औषधि-सेवन करने लगे, तो यात्रा के समय उसे किसी किस्म की कोई शिकायत नहीं रहती।

थेरिडियम 6, 30 — समुद्र-भ्रमण के समय पानी को देखने पर, पानी पीने पर और आंखें बंद कर लेने से तथा वमन होने के लक्षण में यह औषधि देने से बहुत लाभ होता है।

उपर्युक्त औषधि के अलावा सिलिका, सल्फर, हायोसायमस, आर्सेनिक, बोविस्टा, इग्नेशिया, सेलिनियम और सिपिया आदि औषधियां भी लक्षणानुसार लाभ करती हैं। रोगी की अवस्था के अनुसार प्रयोग करें।

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