तीव्र और धीमी नाड़ी का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Tachycardia & Bradycardia Pulse ]

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युवावस्था में नाड़ी का स्पंदन प्रायः 80-85 बार होता है, पर कभी-कभी किसी की नाड़ी का स्पंदन 100 से 140 अथवा 150 से 200 बार तक भी होता है। इसका कारण हृदय की गति तेज होना ही है, इसको अंग्रेजी में “टैकिकार्डिया” कहते हैं। यह देखने में आता है कि कितनों ही के हृदय और नाड़ी की तेज गति सारा जीवन ही बनी रहती है, फिर भी किसी प्रकार का विशेष रोग उन्हें नहीं होता। निम्न कारणों से हृदय और नाड़ी की गति तीव्र होती है।

बहुत अधिक परिश्रम, हृदय की वृद्धि, हृदय-मसल्स का प्रदाह, नया हृदयावरक झिल्ली-प्रदाह, हृदयांतर्वेष्टन-शोथ, हृदय-शूल, महाधमनी-प्रदाह, आर्टरी का मोटा पड़ जाना, ज्वर, स्नायुमंडल का कोई यांत्रिक रोग, सुषुम्ना का कोमल पड़ जाना, नया उच्चगामी पक्षाघात, टाइफॉयड, डिफ्थीरिया, यक्ष्मा, कैंसर उपदंश, पुराना मलेरिया, चाय-कॉफी अधिक पीने आदि से भी नाड़ी की गति तीव्र हो जाती है। इस रोग का भावीफल बुरा नहीं है, यदि मस्तिष्क के रोग के कारण हो जाए, तो चिंता की बात है।

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हृदय की तीव्र गति के विषय में बता दिया गया है, पर कभी-कभी किसी के हृदय की गति और नाड़ी का स्पंदन स्वाभाविक की अपेक्षा धीमा (कम) होता है, यहां तक कि एक मिनट में 40-50 बार ही स्पंदन होता है, इसको “ब्रडिकार्डिया” कहते हैं। यदि किसी रोगी के किसी कडे रोग में नाड़ी की ऐसी धीमी गति मिले, तो चिकित्सक को रोगी पर विशेष दृष्टि रखनी चाहिए। कई प्रकार के रोगों में नाड़ी का स्पंदन धीमा हो सकता है, जैसे बहुत दिनों तक ज्वर होने के बाद आरोग्य की दुर्बलता में, मंदाग्नि और पाकस्थली के जख्म या कैंसर के रोग में, फेफड़े के रोग में, हृदय के रोग में, मूत्र-संबंधी रोग, तंबाकू, कॉफी, शराब आदि के द्वारा विषाक्त हो जाना, रक्तहीनता, हरित्पाण्डु रोग, मिर्गी, मस्तिष्क में जल इकट्ठा होना, मस्तिष्क का ट्यूमर, गरदन की हड्डी में चोट, मेरुदंड का कोई पुराना रोग, मेरुमज्जा का प्रदाह, जौन्डिस, मस्तिष्क की झिल्ली का प्रदाह आदि कितने ही ऐसे रोग हैं, जिनके कारण नाड़ी की गति धीमी हो जाती है।

तीव्र नाड़ी-गति वालों के लिए औषधियां इस प्रकार हैं-एकोनाइट, एबिस, आर्सेनिक, एण्टिम, एपोसाइनम, आर्निका, बेल, ब्रायो, कैक्टस, कोलची, कालिंसो, कानवैलेरिया, कैटिगस, डिजिटेलिस, आइबेरिस, कैलमिया, लैके, लिलियम लाइको, मार्फिया, नैजा, नैट्रम म्यूर, एसाफी, फॉस, फाइटो, रस-टॉक्स, टैबेकम, टेरिबिंथ, थायरायडिन, वेरेट।

धीमी नाड़ी-गति वालों के लिए औषधियां एबिस, एडोनिस, एपोसाइनम, कैक्टस, कैम्फर, कॉस्टिकम, कोलचिकम, कूप्रम, डिजिटेलिस, एसेरिन, जेलसि, हैलिबोरस, कैलमिया, मार्फिनम, नैजा, रस-टॉक्स, स्पाइजे, विरिङ।।

नाड़ी तेज (और धीमी पर्याय) क्रम से — डिजिटेलिस, जेलसि, मार्फिया, एसिड म्यूर।।

नोट — मूल रोग का पता लगाकर औषधि का चुनाव करना चाहिए।

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