तृष्णा या प्यास का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Thirst ]

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प्यास का अधिक होना

ब्रायोनिया 30 — प्यास बहुत रहती है। बार-बार अधिक मात्रा में पानी पीना, फिर भी प्यास बनी रहना। इसमें इस औषधि के सेवन से प्यास पर कंट्रोल हो जाता है।

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नैट्रम म्यूर 30 — तीव्र ज्वर आदि में ठंड लगने पर भी बेहद प्यास लगना।

एकोनाइट 30 — ज्वर में प्यास के अधिक होने में उपयोगी है।

डस्केमारा 30 — प्यास का बहुत अधिक होना, किंतु पानी पीते ही मुन हो जाना। इस औषधि के प्रयोग से ऐसी प्यास और वमन में लाभ होता है।

आर्सेनिक 30 — सूखा हुआ मुंह, रोगी ठंडा पानी पीना चाहता है। कभी-कभी पानी पीते ही वमन हो जाता है। ऐसी अमिट प्यास बनी रहती है, जो पानी पीने से भी बुझती नहीं है, गला खुश्क रहता है, रोगी खूब पानी पीता है, किंतु फिर भी शांति नहीं होती।

कैथरिस 30 — गले और पेट में जलन मचती है, प्यास भी अधिक रहती है।

बेलाडोना 30 — ठंडे पानी की प्यास रहती है, मुंह-तथा गला सूखा रहता है, किंतु अधिक मात्रा में पानी प्रिया नहीं जाती, वह कंठ में अटक-सा जाता है।

प्यास कम होना

साइक्लैमेन 3 — संध्या के समय अधिक प्यास लगना, किंतु दिन भर प्यास न होना, तब पानी पीने की इच्छा न करना, मुंह का स्वाद कुछ बिगड़ा हुआ।

जेलसिमियम 3, 30 — सुबह-शाम और रात में यदि बिल्कुल भी प्यास न लगे, तब यह औषधि दें।

ऐण्टिम क्रूड 6 — यदि प्यास बिल्कुल भी न लगे, तब यह उपयोगी है।

एपिस 3x — गर्मी के मौसम में या गर्मी की हालत में भी प्यास न होना, शरीर में जल-संचय होने के रोग में भी प्यास का न होना, इसमें यह औषधि देने से प्यास लगने लगती है।

पल्सेटिला 30 — यदि किसी की प्यास नष्ट हो जाए, तो उसे यह औषधि दें।

चायना 3 — गर्मी के दिनों में, ज्वर में प्यास का न होना एक विचित्र लक्षण है। भोजन के पहले या बाद में भी पानी न पीना, इसमें चायना देने से लाभ होगा।

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