खून में रुकावट का होम्योपैथिक इलाज [ Homeopathic Medicine For Thrombosis ]

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मनुष्य को जीवन रक्त के प्रवाहित होने से ही है। यदि मस्तिष्क में रक्त का एक थक्का भी जम जाए, तो अचेतावस्था आ जाती है। इसी प्रकार हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों या हृदय में रक्त का यह जमा हुआ थक्का जा अटके, तो हृदय में रक्त-प्रवाह बंद हो जाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इसलिए रक्त का प्रवाहित रहना अति आवश्यक है।

मेडोराइनमें 200 — हृदय का अधिक धड़कना तथा हृदय में फड़कन-सी महसूस करना, हृदय में दर्द, शरीर की हरकत से पीड़ा में वृद्धि हो जाए, हृदय में जलन हो; छाती में बोझ-सा महसूस होने की वजह से श्वास लेने में कष्ट हो, तब इस औषधि का प्रयोग करने से लाभ होता है।

मर्क सोल 30 — हृदय के ऊपरी हिस्से में दर्द उठकर ऊपर की ओर जाता है, हृदये बोझल महसूस होता है, धड़कन अधिक होती है, रोगी को भय-सा अनुभव होता है। हृदय इतना दुर्बल प्रतीत होता है कि रोगी घबरा जाता है। ऐसे में यह औषधि लाभ करती है।

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कैल्केरिया आर्स 6x — शरीर के किसी भी अंग में रक्त के जमे हुए थक्के के अटक जाने पर यह औषधि बहुत अच्छा काम करती है। इससे खतरा टल जाता है।

लिलियम टिग्रिनम 200 — समूचे शरीर में हृदय का स्पंदन अनुभव होता है, नाडी अनियमित और तेज चलती है, हृदय-प्रदेश में दर्द होता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो छाती पर बोझ पड़ा है। हृदय के स्थान में ठंड महसूस होती है, तब यह औषधि अत्यंत लाभ करती है।

लाइकोपोडियम 30 — छाती की छोटी अस्थियों में टीस मारने का-सा दर्द, श्वास न आना, भोजन के पश्चात कष्ट का बढ़ना, बिस्तर पर लेटने के बाद घबराहट होना, धड़कन का होना।

आर्निका 1M — रोगी को शरीर में पीड़ा का अनुभव होता है। सिर गरम और शरीर ठंडा होता है। रात में घबराहट बढ़ जाती है। मृत्यु का डर सताने लगता है। रोगी चाहता है कि उसे अकेला छोड़ दिया जाए। वह हतप्रभ, उदासीन, चिड़चिड़ा, दुखी रहता है; ऐसे रोगी को जिसका शरीर इस तरह थका हुआ हो, उसका रक्त का संचार अवरुद्ध होता है। हृदय में रक्त के जमे हुए थक्के के अटक जाने पर यह अत्युत्तम औषधि है।

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